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My Expressions

फिर से उड़ चला

आज जाऊ तो कौन पकड़ लेगा

खुद को खुद से चुरा लू तो कौन झगड़ लेगा

खुद तो ही तो पाने की है खुद से लड़ाई

जीता या हारा ये कौन समझ लेगा

गुस्सा है , लड़ाई है, या जिद कही समाई है

मिलता हूँ सबसे पर खुद से जुदाई है

दुनिया सिखाती है की सबको मनाओ

भीड़ मैं चलो या कही खो जाओ

मैं सीख रहा हूँ चलना, ढूड रहा हूँ रास्ता

दुनिया साथ हो या न हो, खुद और खुदा से हो वास्ता

अकेला भी चला तो कौन पूछ लेगा

मेरी बनायीं पहेली को कौन “बूझ” लेगा

 

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About Yogesh

Exploring self.

Discussion

One thought on “फिर से उड़ चला

  1. Hmm dat has got something

    Posted by Sakshi | May 2, 2012, 12:19 pm

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