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Field experiences, My Expressions

Landless Garden बोलो या फिर बोरीबगीचा

हिंदी मैं इसे बोरीबगीचा कहा जाता है, अंग्रेजी पसंद लोग इसे लैंड लेस गार्डन (Landless Garden) कहना पसंद करते है. गरीब इसे बोरी मैं साग भाजी कहते है. सबने इसे नाम अलग अलग दिया है पर है ये बहुत काम की चीज. पता नही उन किसानो का जो बड़ी जगह मैं खेती करते है और ज्यादा पैसा खेती मैं लगा सकते है वो इस पध्दति को समझ पाएंगे या नही (जैसे मेरे पिता जी बोले बेटा इसमें क्या होगा). लेकिन हमने करके देखा है ५०० किसानो के साथ इसे, जमीन के बिना जो किसान है, गरीब है, बिना सब्जी के जिनको भोजन की आदत है उनके लिए तो ये एक वरदान ही है बोरीबगीचा.
AKRSP (I) ने डांग जिले मैं २०१२ मैं काम करना शुरू किया और बोरीबगीचा तभी यह पे शुरू किया गया. (पहली बार ये अफ्रीका मैं किया गया था और हमारी संस्था के कोई मित्र वहाँ से सीख लाये और सबको बताया).  पहली बार जब किसानो को इसके बारे मैं बताया तो उन्हें भी लगा की इससे क्या होगा? जैसा की हमने इसका नाम ही लैंड लेस रखा था तो हमे सबसे गरीब महिलाओ को जिनके पास जमीन नही थी उन्ही को इसकी ट्रेनिंग दी. तो आइये इसे समझते है और अगर आप चाहे तो इसे बना भी सकते है.  इसको बनाने की पद्दति आवश्यक सामग्रियाँ और  मुख्या चरण निम्न है –
सामग्रियाँ –
१- ५ प्लास्टिक बैग्स (५० Kg वाला खाद का बैग अच्छा रहेगा)
२- अच्छी मिटटी + वर्मी कम्पोस्ट बराबर मात्रा मैं. इतना हो की ५ बैग भरे जा सके.
३- अच्छा बीज (बेल वाली सब्जियों के लिए इसे उपयोग करना बेहतर है- ककड़ी, लौकी, तुरई, करेला जैसी सब्जिया की जा सकती है)
४- एक बाल्टी पानी बैग्स मैं उपयोग करने के लिए
५- ब्लेड
६- एक मोटी लकड़ी १२-१५ cm  जिसकी मोटाई हो और १ मीटर तक लम्बा हो
७- छोटे पत्थर या ईट के टुकड़े

बोरी बगीचा का सामान लाने के बाद इसे निम्न चरणो मैं तैयार किया जा सकता है-
१ – प्लास्टिक बैग को एक जगह पे लाके उसमे मिटटी और वर्मी कम्पोस्ट १:१ के अनुपात मैं अच्छे से मिला के भर ले.
२ – बैग मैं मिलायी हुई खाद और मिट्ठी भरते समय मोटी लकड़ी बैग के बीच मैं खड़ी कर के रख दे.
३- बैग भरते समय पानी डालते रहे ताकि नमी बनी रहे.
४ – बैग से बैग की दूरी ५*५ फ़ीट रखे.
५ – बैग्स को अच्छे से भरने के बाद उसमे दोनों और से अलग अलग ऊंचाई पे ब्लेड से कट लगाये. ध्यान रहे कट इतना हो की २ बीज अंदर डाले जा सके. (अलग अलग उँचाई पे इसलिए ताकि पौध की जड़ो को आराम से पोषक तत्व मिल जाये).
६- पूरा बैग भरने के बाद लकड़ी को आराम से बाहर निकले और खाली जगह मैं छोटे पत्थर और ईट के टुकड़े डाल दे.
(ईट के टुकड़े या पत्थर इसलिए डाले जाते है की पानी देते समय वो नीचे तक पहुंच पाये और नीचे लगाये पौधों तक भी पानी पहुंच जाये.)
इस पूरी प्रक्रिया को ५ प्लास्टिक बैग्स के लिए करे. ( ५ बैग्स इसलिए क्यूंकि आप हर बैग मैं अलग अलग सब्जी के बीज डाल सकते है और सब्जी नियमित समय पे मिलती रहती है)
सारे बैग्स को ऐसी जगह पे रखे जहाँ पे आप पौधों को बढ़ने के लिए जगह दे सके और सूर्य के प्रकाश मिलता रहे. इसमें रोज सुबह शाम थोड़ा थोड़ा पानी देते रहे. अगर आप किसान है तो सारे बैग्स को चारो और से बौंडरी के अंदर रखे टेक मुर्गा या बकरी नुकसान न पहुँचा सके.
एक बार बोरीबगीचा बनाने के ४०-४५ दिन बाद साग भाजी मिलनी प्रारम्भ हो जाती है.

प्रक्रिया

ऊपर वाले हिस्से मैं, कट वाली दोनों जगहों पे २ बीज एक साथ डाल दे. एक बैग मैं ६ बीज की जरुरत है और ३० बीज से एक यूनिट तैयार हो जाती है. हर बैग मैं अलग सब्जी का बीज डाला जा सकता है. एक ही बैग मैं अलग अलग सब्जी के बीज नाही डाले तो बेहतर है.

अनुभव-

हमारा अनुभव है की अगर एक यूनिट (५ बैग्स की एक यूनिट) अगर सही से सँभाल के तैयार की जाये तो किसान को ३-४ महीने तक साग भाजी के लिए कही और जाने की जरुरत नही पड़ती. २००० Rs तक साग भाजी किसान इसमें उगा सकता है. पिछले वर्षो मैं किसानो ने २५-३० kg तक लौकी, तुरई, और करेला का उत्पादन किया है (सब मिला के ५०-६० kg ). जबकि इसे बनाने मैं हमारी और से गरीबतम किसानो को ५ बैग्स (६ Rs का एक बैग) और ३ प्रकार के बीजो का सहयोग किया गया. सब मिलके ५० Rs  की लागत आई. जमीन वाले किसानो को हमने सिर्फ बीज उपलब्ध कराये और बैग्स उन्होंने खुद तैयार किये. २०१३ मैं ५५० किसानो ने डांग मैं इसका उपयोग किया और १००० किसानो तक २०१४ मैं पहुँचने की पूरी संभावना है. इसमें अतिरिक्त पानी की कोई आवश्यकता  नही और रोज के कामो मैं जो पानी बच जाता है उसी का उपयोग इसमें किया जा सकता है. बहुत सूखे इलाको मैं भी इसे आसानी से अपनाया जा सकता है. इसे किसी भी मौसम मैं बनाया जा सकता है; हमारा अनुभव है की मई आखिर मैं और नवंबर के समय इस मैं से उत्पादन बहुत अच्छा रहा है.

बेहतर समझ के लिए इस पूरी प्रक्रिया को फोटो ग्राफ्स के द्वारा समझने की कोशिश की गयी है किन्तु फिर भी अगर समझने मैं कोई परेशानी हो तो आप सम्पर्क कर सकते है.

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